हिंदी भवन में भगवान कश्यप और भारत माता के जयघोष के साथ राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ-जातिगत जनगणना, शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने पर हुआ मंथन

गाजियाबाद। कश्यप-निषाद समाज को सामाजिक और संगठनात्मक रूप से मजबूत करने के उद्देश्य से रविवार को हिंदी भवन में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में एकजुटता का संदेश गूंजा। भगवान कश्यप की मूर्ति के समक्ष पूजा-अर्चना के बाद भारत माता और वंदे मातरम के जयघोष के साथ कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों और जिलों से पहुंचे पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने समाज से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। कार्यशाला में संगठन को गांव, तहसील और जिला स्तर तक मजबूत करने के साथ समाज के लोगों को शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सम्मान और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए सामूहिक प्रयास करने पर जोर दिया गया। कार्यशाला में श्री राम कुमार कश्यप, डॉ. सागर कश्यप, राजवीर कश्यप, विजेंद्र कश्यप, मुकेश कश्यप, वेद कश्यप, सरपंच कश्यप और विशाल कश्यप समेत अनेक पदाधिकारी मंचासीन रहे। अलग-अलग राज्यों और जिलों से आए प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्रों की स्थिति और संगठन के सामने आने वाली चुनौतियों को रखा। इस दौरान पदाधिकारियों ने कहा कि समाज की मजबूती के लिए केवल बड़े कार्यक्रम आयोजित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर संगठन की सक्रियता बढ़ाना जरूरी है। राष्ट्रीय कार्यशाला में जातिगत जनगणना का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति से संबंधित आंकड़े सामने आना आवश्यक है। इसके लिए जातिगत जनगणना को महत्वपूर्ण विषय बताते हुए इस दिशा में जागरूकता बढ़ाने पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि समाज के लोगों को उनके अधिकारों और सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ तभी प्रभावी ढंग से दिलाया जा सकेगा, जब जरूरतमंद लोगों तक संगठन की पहुंच मजबूत होगी। कार्यशाला में शिक्षा और रोजगार से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि समाज के युवाओं को बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसरों से जोडऩे के लिए जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने और उनका लाभ दिलाने के लिए संगठन के कार्यकर्ताओं को सक्रिय भूमिका निभाने की बात कही गई। कार्यशाला में सबसे अधिक जोर संगठन विस्तार पर रहा। पदाधिकारियों ने कहा कि कश्यप-निषाद समाज की ताकत उसकी एकजुटता में है। इसके लिए हर जिले में सक्रिय संगठन खड़ा करने के साथ तहसील और गांव स्तर तक कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की आवश्यकता है। स्थानीय स्तर पर समाज के लोगों से लगातार संपर्क रखने, उनकी समस्याओं को समझने और उन्हें संगठन से जोडऩे की रणनीति पर भी मंथन हुआ। विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन की स्थिति की जानकारी साझा की। इसके आधार पर संगठनात्मक गतिविधियों को और व्यापक बनाने पर सहमति बनी। कार्यकर्ताओं से कहा गया कि वे समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचें और उसे संगठन की गतिविधियों से जोड़ें। वक्ताओं ने आपसी समन्वय और संवाद को संगठन की मजबूती का आधार बताया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि कश्यप-निषाद समाज को मजबूत बनाने के लिए संगठन को केवल बड़े आयोजनों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। गांव, तहसील और जिला स्तर तक संगठन को सक्रिय और प्रभावी बनाना होगा। उन्होंने कहा कि समाज के लोगों को एकजुट कर उनकी सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में लगातार काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने जातिगत जनगणना जैसे विषयों को गंभीरता से उठाने पर जोर देते हुए कहा कि समाज की वास्तविक संख्या और स्थिति से संबंधित आंकड़े सामने आना जरूरी है। इससे पात्र लोगों तक उनके अधिकार और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में मदद मिलेगी। उन्होंने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से आपसी समन्वय के साथ संगठन का विस्तार करने तथा समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का आह्वान किया। कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि संगठन की मजबूती के साथ समाज में जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सम्मान और सरकारी योजनाओं से जुड़े विषयों को सामूहिक रूप से उठाने के लिए मजबूत संगठनात्मक ढांचे की जरूरत है। कार्यक्रम में मौजूद प्रतिनिधियों ने संगठन की गतिविधियों को लगातार आगे बढ़ाने और अधिक से अधिक लोगों को जोडऩे का संकल्प लिया। उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों और जिलों से पदाधिकारियों की मौजूदगी के कारण कार्यशाला को व्यापक स्वरूप मिला। अलग-अलग क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों के विचारों और सुझावों के आधार पर आगे की संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने पर चर्चा हुई। हिंदी भवन में भगवान कश्यप और भारत माता के जयघोष से शुरू हुई राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन समाज की एकजुटता, संगठन विस्तार और जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ।


