बेटों ने ठुकराया तो बेघर बुजुर्ग को नहीं मिला अंतिम सहारा, मौत के बाद शव लेने भी नहीं पहुंचे परिजन
गाजियाबाद। जिस पिता ने कभी अपने बच्चों को पाल-पोसकर बड़ा किया होगा, उसी के अंतिम समय में बेटे और रिश्तेदारों ने मुंह मोड़ लिया। बेघर बुजुर्ग ऑटो चालक विजय गुप्ता की मौत के बाद भी कोई परिजन उनका शव लेने नहीं पहुंचा। पुलिस की सूचना के बावजूद परिवार के लोगों ने शव की पहचान करने और उसे लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद बुधवार को बुजुर्ग के शव का अज्ञात में पोस्टमार्टम कराया गया। बुजुर्ग की दो नवंबर को एमएमजी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। उन्हें रेबीज के लक्षण थे। ईस्ट दिल्ली की झिलमिल कॉलोनी निवासी विजय गुप्ता साहिबाबाद क्षेत्र में ऑटो चलाकर अपना जीवन यापन करते थे। उनके परिचित मुकेश के मुताबिक करीब एक महीने पहले उनके बेटों ने उन्हें घर से निकाल दिया था। इसके बाद वह शहीद नगर मेट्रो स्टेशन के पास एक तख्त पर रहने लगे थे। उम्र के इस पड़ाव पर परिवार का साथ छूटने के बाद वह सड़क किनारे ही दिन गुजारने को मजबूर थे। करीब 15 दिन पहले एक कुत्ते ने विजय गुप्ता के पैर में काट लिया था। उन्होंने शुरुआत में इसे गंभीरता से नहीं लिया। धीरे-धीरे घाव बढऩे लगा और उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई। 30 अक्टूबर को शहीद नगर मेट्रो स्टेशन के पास उनकी हालत खराब होने पर 108 एंबुलेंस की मदद से उन्हें एमएमजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां दो नवंबर की सुबह करीब नौ बजे उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। एमएमजी अस्पताल के सीएमएस डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि बुजुर्ग में हाइड्रोफोबिया यानी पानी से डरने जैसे लक्षण दिखाई दिए थे। वहीं, पोस्टमार्टम हाउस के फार्मासिस्ट जगदीश यादव के मुताबिक पुलिस ने मृतक के परिजनों को सूचना देकर मोर्चरी पहुंचकर शव की पहचान करने के लिए कहा था। लेकिन परिजनों ने शव लेने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने पुलिस से कहा कि बुजुर्ग से उनका कोई लेना-देना नहीं है और शव का जैसे चाहें निस्तारण कर दें। परिजनों के इस रवैये के बाद पुलिस ने शव की पहचान और सुपुर्दगी की प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर अज्ञात में पोस्टमार्टम कराया। परिवार से बेदखल होकर सड़क किनारे जिंदगी गुजारने वाले बुजुर्ग को मौत के बाद भी अपनों का साथ नहीं मिल सका।



