गाजियाबाद

शिकायतों पर डीसीपी की सीधी नजर, लापरवाही पर सख्त कार्रवाई के संकेत

गाजियाबाद। फरियादियों की शिकायतों के निस्तारण को लेकर पुलिस उपायुक्त नगर/ट्रांस हिंडन धवल जायसवाल ने सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को अपने कार्यालय में पहुंचे लोगों से उन्होंने सीधे वार्ता कर उनकी समस्याओं को सुना। इस दौरान उन्होंने शिकायतों की स्थिति को समझने के साथ ही संबंधित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। डीसीपी ने स्पष्ट किया कि फरियादियों की समस्या को सुनना और उसका उचित समाधान करना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। कार्यालय में शिकायत लेकर पहुंचे लोगों से डीसीपी ने एक-एक कर बातचीत की और उनकी ओर से बताई गई समस्याओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने संबंधित मामलों की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया। डीसीपी का जोर इस बात पर रहा कि किसी भी शिकायत को केवल औपचारिकता के तौर पर न लिया जाए, बल्कि उसके तथ्यों की जांच कर नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई की जाए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि शिकायतकर्ता को कार्रवाई की स्थिति से अवगत कराया जाए, ताकि उसे अपनी शिकायत के संबंध में स्पष्ट जानकारी मिल सके। डीसीपी द्वारा कार्यालय में स्वयं फरियादियों से संवाद करने और संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश देने से पुलिस की जनसुनवाई व्यवस्था को लेकर स्पष्ट संदेश गया है कि शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। पुलिस उपायुक्त ने सभी संबंधित अधिकारियों को शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण, निष्पक्ष और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
डीसीपी धवल जायसवाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि थाने और पुलिस कार्यालय स्तर पर आने वाली शिकायतों का निस्तारण निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ किया जाए। शिकायत के निस्तारण में अनावश्यक देरी किसी भी स्थिति में नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस के पास अपनी समस्या लेकर आने वाला प्रत्येक व्यक्ति त्वरित और उचित कार्रवाई की उम्मीद करता है। ऐसे में उसकी बात को गंभीरता से सुनना और नियमानुसार समाधान कराना पुलिस की जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि शिकायतों के निस्तारण में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए। केवल कागजी कार्रवाई पूरी कर शिकायत को समाप्त दिखाने के बजाय वास्तविक समस्या का समाधान किया जाए। यदि किसी प्रकरण में जांच या अन्य विभागीय कार्रवाई की आवश्यकता है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाए। डीसीपी ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि फरियादियों को बार-बार पुलिस कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। डीसीपी की कार्यशैली में शिकायतों की निगरानी और अधिकारियों की जवाबदेही पर विशेष जोर दिखाई दिया। उन्होंने संबंधित पुलिसकर्मियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित समय सीमा के भीतर उसका निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही शिकायतों के निस्तारण में किसी प्रकार की लापरवाही या अनावश्यक देरी सामने आने पर संबंधित स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी। डीसीपी ने कहा कि पुलिस की कार्यप्रणाली का सीधा असर आम लोगों के विश्वास पर पड़ता है। इसलिए अधिकारी और कर्मचारी फरियादियों के साथ संवेदनशीलता से पेश आएं और उनकी समस्याओं को सुनकर कानून के अनुसार कार्रवाई करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पीडि़त या शिकायतकर्ता की बात को नजरअंदाज करना किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगा। धवल जायसवाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनसुनवाई को प्रभावी बनाने के लिए शिकायतों पर लगातार नजर रखी जाए। शिकायत प्राप्त होने के बाद उसके निस्तारण तक की प्रक्रिया की निगरानी हो और जरूरत के अनुसार वरिष्ठ अधिकारियों को भी प्रकरण की जानकारी दी जाए। उनका जोर शिकायत के त्वरित समाधान के साथ-साथ ऐसी कार्रवाई पर रहा, जिससे फरियादी को वास्तविक राहत मिल सके। पुलिस उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में तत्काल कार्रवाई की जाए और गंभीर प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाए। उन्होंने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल शिकायत सुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि शिकायतकर्ता को न्यायसंगत कार्रवाई का भरोसा दिलाना और उस भरोसे को कायम रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

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