50 लाख के नकली सप्लीमेंट-दवाओं के साथ गिरोह के पांच सदस्य गिरफ्तार, ऊंचे दामों पर बाजार में करते थे बिक्री

गाजियाबाद। शालीमार गार्डन थाना पुलिस और स्वाट/सर्विलांस टीम ट्रांस हिंडन जोन ने नकली सप्लीमेंट और एलोपैथिक दवाएं तैयार कर बाजार में बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से करीब 50 लाख रुपये कीमत के नकली सप्लीमेंट और एलोपैथिक दवाएं बरामद करने का दावा किया है। आरोपियों द्वारा अलग-अलग कंपनियों के नाम और मोनोग्राम वाले फर्जी लेबल व पैकिंग का इस्तेमाल कर नकली उत्पादों को असली बताकर बेचा जाता था। पुलिस के मुताबिक, 15 सितंबर को मुखबिर की सूचना पर टीम ने कार्रवाई करते हुए दिलीप पांडेय (39), वीरभान उर्फ रवि (34), रोहित वक्शी उर्फ लड्डू (35), हन्नी कुलश्रेष्ठ (30) और आर्यन (24) को गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से नकली तरीके से तैयार किए गए सप्लीमेंट और एलोपैथिक दवाएं बरामद की गईं। पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि दवाओं और फूड प्रोडक्ट का कच्चा माल, प्रिंटिंग लेबल, प्रिंटेड मोनो कार्टन और खाली प्लास्टिक की शीशियां खरीदी जाती थीं। इसके बाद इन्हीं सामग्री की मदद से नकली उत्पाद तैयार किए जाते थे। तैयार माल पर अलग-अलग कंपनियों के नाम और मोनोग्राम वाले फर्जी कवर और लेबल लगाए जाते थे। बाद में इन उत्पादों को बाजार में ऊंचे दामों पर बेचकर मुनाफा कमाया जाता था। पुलिस के अनुसार आरोपी विजयनगर क्षेत्र में ‘न्यूट्रिशन वर्ल्ड’ और ‘न्यूट्रिशन अड्डा’ नाम से दुकान भी चला रहे थे। पूछताछ में रोहित, हन्नी और आर्यन ने बताया कि वे विजयनगर स्थित एक गोदाम में काम करते थे। पुलिस के मुताबिक, इस गोदाम का संचालन ललित शर्मा करता था और यहीं नकली माल तैयार कर बिक्री के लिए भेजा जाता था। जांच के दौरान पुलिस पूछताछ में ललित शर्मा की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार ललित कच्चा माल खरीदने के साथ तैयार माल की बिक्री का काम करता था, जबकि गिरफ्तार आरोपी गोदाम और दुकानों की गतिविधियों को संभालते थे। पुलिस अब ललित शर्मा समेत इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ शालीमार गार्डन थाने में मुकदमा दर्ज कर अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही आरोपियों के अन्य आपराधिक इतिहास की भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि नकली सप्लीमेंट और दवाओं की सप्लाई किन-किन स्थानों पर की जाती थी और गिरोह से जुड़े अन्य लोग कौन हैं।



