गोकुल की बेटी ने थाईलैंड में बढ़ाया ब्रज का गौरव, अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में डॉ. अंजना तिवारी ने प्रस्तुत किया शोधपत्र

-संस्कृत रत्न सम्मान’ से हुईं सम्मानित
मथुरा। ब्रजभूमि की प्रतिभा ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान दर्ज कराई है। गोकुल, मथुरा की मूल निवासी डॉ. अंजना तिवारी ने थाईलैंड के बैंकॉक स्थित सिल्पाकॉर्न विश्वविद्यालय में आयोजित वैश्विक संस्कृत सम्मेलन-2026 में भारत का प्रतिनिधित्व कर ब्रज का गौरव बढ़ाया। 28 से 30 सितंबर तक आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों के संस्कृत विद्वानों, शोधार्थियों और भारतीय ज्ञान परंपरा के विशेषज्ञों ने भाग लिया।
सम्मेलन का मुख्य विषय ‘भारतीय ज्ञान परंपरा : संस्कृतियों और ज्ञान परंपराओं के बीच एक सेतु’ था। सम्मेलन में भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत साहित्य, दर्शन और संस्कृति से जुड़े विभिन्न विषयों पर विद्वानों ने अपने शोध और विचार प्रस्तुत किए।
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में डॉ. अंजना तिवारी का शोधपत्र ‘कथा परंपराएं और दार्शनिक विमर्श : भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में भागवत पुराण में कपिल और देवहूति का संवाद’ स्वीकार किया गया। उन्होंने सम्मेलन में अपने शोधपत्र को प्रस्तुत करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित दार्शनिक चिंतन, कथा परंपरा और संस्कृत साहित्य की समृद्ध विरासत को अंतरराष्ट्रीय विद्वत समाज के सामने रखा।
संस्कृत के प्रति योगदान के लिए मिला ‘संस्कृत रत्न सम्मान’
सम्मेलन के दौरान संस्कृत भाषा, भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान परंपरा के प्रचार-प्रसार तथा संस्कृत के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. अंजना तिवारी को ‘संस्कृत रत्न सम्मान’ से सम्मानित किया गया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर शोधपत्र प्रस्तुति के साथ यह सम्मान उनकी शैक्षणिक एवं शोध यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
डॉ. अंजना तिवारी वर्तमान में महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, बड़ौदा के संस्कृत, पालि एवं प्राकृत विभाग में सहायक आचार्य के रूप में कार्यरत हैं। विशेष बात यह है कि वे अपने गांव से पीएचडी करने वाली पहली महिला हैं। गोकुल की सामान्य पृष्ठभूमि से निकलकर अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंच तक पहुंचने की उनकी यात्रा क्षेत्र की बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणादायी है।
डॉ. अंजना ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने गुरुजनों, माता-पिता और परिवार को दिया है। उनका कहना है कि परिवार और गुरुजनों से मिले संस्कार एवं मार्गदर्शन ने उन्हें निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
गोकुल की बेटी की इस उपलब्धि से गोकुल, मथुरा और संपूर्ण ब्रज क्षेत्र में हर्ष और गौरव का वातावरण है। संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित करने में डॉ. अंजना तिवारी का यह प्रयास ब्रज की उस विद्वत परंपरा की निरंतरता को भी रेखांकित करता है, जिसने सदियों से भारतीय संस्कृति, दर्शन और साहित्य को समृद्ध किया है।



