बाल्मीकि सभागार पर कब्जे की शिकायत, महापौर ने दिए जांच के आदेश, कर्मचारी नेताओं पर लगाए गंभीर आरोप

गाजियाबाद। हिण्डन विहार स्थित नगर निगम के बाल्मीकि सभागार पर कथित कब्जे का मामला सामने आने के बाद नगर निगम में हलचल मच गई है। कई पार्षदों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने महापौर सुनीता दयाल को शिकायत देकर आरोप लगाया है कि नगर निगम द्वारा क्षेत्रवासियों की सुविधा के लिए बनाए गए बाल्मीकि सभागार पर कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि सभागार में ताला लगाकर रखा जाता है और रात के समय यहां गलत गतिविधियां होने की बात भी सामने आई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए महापौर ने तत्काल जांच कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। करीब एक वर्ष पूर्व गाजियाबाद नगर निगम की ओर से हिण्डन विहार में बाल्मीकि सभागार का निर्माण कराया गया था। इसका उद्देश्य आसपास रहने वाले लोगों को सामाजिक और पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध कराना था। क्षेत्रवासियों को उम्मीद थी कि सभागार में शादी, बेटी-बेटे के कार्यक्रम, बैठक और अन्य सार्वजनिक आयोजन आसानी से किए जा सकेंगे। नगर निगम के निर्माण विभाग की ओर से सभागार को संपत्ति विभाग को हस्तांतरित करने के लिए पत्राचार भी किया जा चुका है। इसी बीच महापौर के सामने शिकायत पहुंची कि सभागार का उपयोग क्षेत्रवासियों की सुविधा के बजाय कुछ लोगों द्वारा निजी तौर पर किया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कर्मचारी नेताओं से जुड़े कुछ लोगों ने सभागार पर अपना ताला लगा रखा है। इससे स्थानीय लोगों को नगर निगम की ओर से बनाए गए भवन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। रात के समय सभागार में संदिग्ध गतिविधियां होने की शिकायत भी महापौर के संज्ञान में लाई गई है। शिकायत मिलने के बाद महापौर सुनीता दयाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए। उन्होंने संपत्ति विभाग के अधिकारियों से भी बातचीत कर पूरे मामले की जानकारी ली है। महापौर ने स्वयं मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण करने की बात कही है, ताकि सभागार की वास्तविक स्थिति सामने आ सके और यदि किसी प्रकार का अवैध कब्जा पाया जाता है तो उसे तत्काल हटाया जा सके। महापौर सुनीता दयाल ने कहा कि उनके संज्ञान में आया है कि किसी कर्मचारी नेता की ओर से नगर निगम के सभागार पर कब्जा किए जाने की शिकायत की गई है। इस संबंध में अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए गए हैं। यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि नगर निगम की भूमि और भवन किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं हैं। सरकारी संपत्ति पर किसी भी व्यक्ति का कब्जा या उसका निजी इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जाएगा। नगर निगम की संपत्तियों को निजी संपत्ति समझकर कब्जा करने की प्रवृत्ति पूरी तरह गलत है और यह सरकारी हितों के विपरीत है। उन्होंने संकेत दिया कि जांच पूरी होने के बाद बाल्मीकि सभागार को जल्द कब्जामुक्त कराकर क्षेत्रवासियों के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। महापौर के निर्देश के बाद अब नगर निगम के संबंधित विभागों की जांच पर लोगों की नजर है। यदि शिकायत सही पाई जाती है तो सभागार से कब्जा हटाने के साथ जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।



