एसडीजीआई में विद्यार्थियों ने सीखी आधुनिक तकनीक, विद्यार्थियों को कराया औषधि अनुसंधान की नई विधाओं से परिचित

गाजियाबाद। डासना स्थित एसडीजीआई ग्लोबल यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज की ओर से मॉलिक्यूलर डॉकिंग एवं आभासी छंटाई विषय पर बुधवार को एक दिवसीय तकनीकी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में फार्मेसी के विद्यार्थियों और शिक्षकों को आधुनिक औषधि खोज में उपयोग होने वाली कंप्यूटर आधारित तकनीकों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञ ने विद्यार्थियों को कंप्यूटर आधारित औषधि अभिकल्पना, मॉलिक्यूलर डॉकिंग, आभासी छंटाई और ऑटोडॉक सॉफ्टवेयर के व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को औषधि अनुसंधान के बदलते स्वरूप से जोडऩा और उन्हें प्रयोगशाला आधारित अध्ययन के साथ आधुनिक कंप्यूटेशनल तकनीकों की उपयोगिता समझाना रहा। मुख्य संसाधन व्यक्ति उत्सव गुप्ता, अनुसंधान सहयोगी, गुप्ता कंटेंट कंसल्टेंसी, ग्रेटर नोएडा ने विद्यार्थियों को कंप्यूटेशनल औषधि खोज की विभिन्न अवधारणाओं की विस्तार से जानकारी दी। उत्सव गुप्ता ने बताया कि आधुनिक औषधि अनुसंधान में कंप्यूटर आधारित तकनीकों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इन तकनीकों की मदद से संभावित औषधीय अणुओं का अध्ययन करने, जैविक लक्ष्यों के साथ उनकी संभावित अंत:क्रियाओं का आकलन करने और आगे के अनुसंधान के लिए उपयोगी यौगिकों की पहचान करने में सहायता मिलती है। उन्होंने कंप्यूटर आधारित औषधि अभिकल्पना की अवधारणा समझाते हुए बताया कि कंप्यूटर की सहायता से औषधीय अणुओं की संरचना और उनके संभावित व्यवहार का अध्ययन किया जा सकता है। मॉलिक्यूलर डॉकिंग के माध्यम से किसी अणु की जैविक लक्ष्य अथवा ग्राही के साथ संभावित बंधन क्षमता और अंत:क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। विद्यार्थियों को लिगैंड, ग्राही, बंधन स्थल और आणविक अंत:क्रियाओं से संबंधित महत्वपूर्ण अवधारणाओं को उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया। कार्यशाला में आभासी छंटाई पर भी विशेष चर्चा हुई। विद्यार्थियों को बताया गया कि कंप्यूटर आधारित छंटाई के माध्यम से बड़ी संख्या में यौगिकों का अध्ययन कर संभावित रूप से उपयोगी अणुओं को आगे के अनुसंधान के लिए प्राथमिकता दी जा सकती है। इससे औषधि खोज के शुरुआती चरणों में अनुसंधान प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है।
तकनीकी सत्र में ऑटोडॉक-1.5.7 सॉफ्टवेयर पर विशेष ध्यान दिया गया। विद्यार्थियों को मॉलिक्यूलर डॉकिंग अध्ययन में इसके उपयोग और प्रासंगिकता से अवगत कराया गया। विशेषज्ञ ने कंप्यूटेशनल औषधि खोज की विभिन्न प्रक्रियाओं को समझाते हुए बताया कि संभावित औषधीय अणुओं और जैविक लक्ष्यों के बीच होने वाली अंत:क्रियाओं का कंप्यूटर आधारित अध्ययन किस प्रकार किया जा सकता है। सत्र के दौरान मॉलिक्यूलर डॉकिंग आधारित औषधि खोज से जुड़े उदाहरण और अध्ययन भी प्रस्तुत किए गए। इससे विद्यार्थियों को विषय की व्यावहारिक उपयोगिता समझने का अवसर मिला। उन्होंने यह भी जाना कि आधुनिक औषधि अनुसंधान बहुविषयक क्षेत्र है, जिसमें फार्मेसी के साथ कंप्यूटर विज्ञान, जैव-सूचना विज्ञान और संरचनात्मक जीवविज्ञान जैसे क्षेत्रों का समन्वय महत्वपूर्ण है। कार्यशाला का शुभारंभ अतिथियों और मुख्य संसाधन व्यक्ति के पुष्प स्वागत के साथ हुआ। स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज की निदेशक प्रो. (डॉ.) शालिनी शर्मा ने स्वागत संबोधन में कहा कि फार्मेसी शिक्षा को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों और अनुसंधान पद्धतियों से जोडऩा समय की आवश्यकता है। ऐसी कार्यशालाओं से विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से आगे बढ़कर व्यावहारिक और समसामयिक वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त होती है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रसेनजीत कुमार ने विद्यार्थियों को नई तकनीकों को सीखने और अनुसंधान के प्रति रुचि विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने अकादमिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ते हुए फार्मास्यूटिकल उद्योग और अनुसंधान क्षेत्र की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी कौशल विकसित करना चाहिए। कार्यशाला का समन्वय निशु गौतम, सहायक प्रोफेसर ने किया, जबकि संचालन पलक हिंदवाल, सहायक प्रोफेसर ने किया। समापन पर डॉ. अभिषेक शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में पंजीकृत विद्यार्थियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए। विद्यार्थियों ने कार्यशाला को आधुनिक औषधि अनुसंधान और कंप्यूटर आधारित तकनीकों को समझने की दिशा में उपयोगी बताया। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति महेंद्र अग्रवाल, उपाध्यक्ष अखिल अग्रवाल, प्रो-चांसलर नितिन अग्रवाल, प्रो-चांसलर (प्रशासन) पीयूष श्रीवास्तव और प्रो-चांसलर (शैक्षणिक) विमल कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला ने विद्यार्थियों को औषधि अनुसंधान की आधुनिक तकनीकों से जोडऩे का अवसर प्रदान किया।
