स्वाइन फ्लू के दो मामले, दोनों मरीज स्वस्थ; स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी

गाजियाबाद। जिले में जनवरी से अगस्त तक स्वाइन फ्लू के दो हल्के मामले सामने आए हैं। दोनों मरीजों का इलाज निजी अस्पताल में हुआ और उनकी जांच भी निजी प्रयोगशाला में कराई गई थी। जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने दोनों मामलों की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं। हालांकि मौसम में बदलाव और संक्रमण की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने मौसमी इन्फ्लुएंजा, जिसमें इन्फ्लुएंजा-ए और एच1एन1 शामिल हैं, को लेकर एडवाइजरी जारी की है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार स्वाइन फ्लू एक संक्रामक श्वसन रोग है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या उसके निकट संपर्क में आने से फैल सकता है। सामान्य तौर पर अधिकांश मरीज उचित देखभाल से स्वस्थ हो जाते हैं, लेकिन कुछ उच्च जोखिम वाले लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी के अनुसार अचानक तेज बुखार या ठंड लगना, सूखी खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द तथा अत्यधिक थकान इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। बच्चों में उल्टी या दस्त की समस्या भी दिखाई दे सकती है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि खांसते और छींकते समय मुंह और नाक को रुमाल, टिश्यू या कोहनी से ढकें। साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोएं अथवा अल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें। गंदे हाथों से आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें। भीड़भाड़ और बंद स्थानों में मास्क का प्रयोग करने के साथ पर्याप्त हवा के आवागमन की व्यवस्था रखने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवाएं न लेने की सलाह दी है। बीमार होने पर कार्यालय या स्कूल जाने से बचें और दूसरों के निकट संपर्क में न आएं। पर्याप्त आराम करने के साथ पानी, सूप और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करते रहें। सार्वजनिक स्थानों पर खुले में थूकने से भी बचने की अपील की गई है। उच्च जोखिम वाले लोग फ्लू का टीका लगवाने के संबंध में चिकित्सक से सलाह ले सकते हैं। 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग, छह वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को संक्रमण के प्रति विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। अस्थमा, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी और मधुमेह जैसी दीर्घकालिक बीमारियों से पीडि़त लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने सांस लेने में परेशानी, सीने में तेज दर्द या दबाव, होंठ अथवा नाखूनों का नीला पडऩा, अत्यधिक कमजोरी, बेहोशी या असामान्य सुस्ती, लगातार तेज बुखार रहने अथवा अचानक हालत बिगडऩे जैसे लक्षणों को गंभीरता से लेने की सलाह दी है। बच्चों का दूध या भोजन न लेना अथवा अत्यधिक सुस्ती भी चेतावनी का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेने की अपील की गई है।



