भूगर्भ जल संरक्षण पर प्रशासन सख्त, जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आवेदनों पर हुआ फैसला

गाजियाबाद। महात्मा गांधी सभागार, कलेक्ट्रेट में मंगलवार को जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ की अध्यक्षता में जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद में भूगर्भ जल के संरक्षण, कूप पंजीकरण तथा अनापत्ति प्रमाण पत्र से संबंधित प्राप्त आवेदनों की समीक्षा करते हुए नियमानुसार उनके निस्तारण पर निर्णय लिया गया। बैठक में घरेलू कूप पंजीकरण के लिए प्राप्त छह आवेदनों पर विचार किया गया। जांच और निर्धारित प्रक्रिया के बाद इनमें से चार आवेदनों को स्वीकृति प्रदान की गई, जबकि दो आवेदनों को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया। अधिकारियों ने भूगर्भ जल से जुड़े मामलों में नियमों के अनुरूप प्रक्रिया सुनिश्चित करने पर जोर दिया। अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए प्राप्त तीन आवेदनों की भी बैठक में समीक्षा की गई। परिषद ने निर्णय लिया कि इन सभी तीन आवेदनों का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। इसके लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए। समिति में संबंधित अधिकारियों के साथ जिलाधिकारी की ओर से नामित प्रतिनिधि को भी शामिल किया जाएगा। अनापत्ति प्रमाण पत्र के नवीनीकरण से संबंधित कुल 11 आवेदनों पर भी विचार-विमर्श हुआ। इनमें से चार मामलों में संबंधित खंड विकास अधिकारियों को गोद लिए गए तालाबों का भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए गए। वहीं सात आवेदनों को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि सभी प्रकरणों में निर्धारित नियमों और आवश्यक अभिलेखों की जांच के बाद ही कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैठक में जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद के साथ जिला कृषि विभाग, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जल निगम, उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र, नगर निगम, उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण तथा विकासखंड विभागों के अधिकारी और प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी विभागों के बीच समन्वय के साथ भूगर्भ जल से संबंधित कार्यों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। बैठक के अंत में नोडल अधिकारी ने जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ एवं जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही बैठक का समापन हुआ।



