नन्हे कंधों पर कांवड़, होठों पर बोल बम, नन्हे कांवडिय़ों का उत्साह देखकर हर कोई रह गया भावविभोर

गाजियाबाद। कंधों पर छोटी-छोटी कांवड़, माथे पर तिलक और होठों पर हर-हर महादेव और बोल बम का जयघोष… नन्हे कदम लगातार अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं। सावन की कांवड़ यात्रा में इस बार नन्हे कांवडिय़ों का उत्साह लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। उम्र छोटी है, लेकिन भोलेनाथ के प्रति आस्था किसी बड़े भक्त से कम नहीं। तपती सड़क हो या बारिश की फुहार, बच्चों के कदम शिवभक्ति की राह पर लगातार आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं। कांवड़ मार्ग पर इन नन्हे भक्तों को देखकर यह भी साफ नजर आ रहा है कि शिवभक्ति और कांवड़ यात्रा की परंपरा नई पीढ़ी तक पूरी श्रद्धा के साथ पहुंच रही है। बुजुर्गों और युवाओं के साथ बच्चे भी कांवड़ उठाकर अपने आराध्य भगवान शिव के धाम की ओर बढ़ रहे हैं। दिल्ली के चांदनी चौक की रहने वाली पांच वर्षीय माही भी अपने परिवार के साथ कांवड़ यात्रा पर निकली है। छोटी सी उम्र में कांवड़ उठाए माही के चेहरे पर न थकान नजर आई और न ही यात्रा की परेशानी। परिजनों के मुताबिक माही लगातार दूसरे साल कांवड़ ला रही है। इस बार भी उसने परिवार के साथ कांवड़ यात्रा पर जाने की खुद ही जिद की थी। कांवड़ मार्ग पर माही को देखकर गुजर रहे श्रद्धालु भी उसकी भक्ति और उत्साह की तारीफ करते नजर आए। वहीं 11 वर्षीय एक बच्चा भी अकेले छोटी कांवड़ कंधे पर रखकर यात्रा करता दिखाई दिया। उसके चेहरे पर आत्मविश्वास और कदमों में गजब का उत्साह था। कांवड़ यात्रा में युवाओं का उत्साह भी देखने को मिल रहा है। बृहस्पतिवार को 15 वर्षीय हर्षित और आनंद हरिद्वार से कांवड़ लेकर गंतव्य की ओर बढ़ते दिखाई दिए। दोनों कक्षा 11 के वाणिज्य वर्ग के छात्र हैं। उन्होंने बताया कि वे भोलेनाथ से अपने सफल भविष्य और स्टार्टअप के लिए आशीर्वाद मांगने कांवड़ लेकर निकले हैं। दिल्ली के छतरपुर निवासी शिवम भी अपने माता-पिता राकेश और अनिता के साथ कांवड़ यात्रा कर रहा है। परिवार ने बच्चे की सुविधा और सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा है। तेज बारिश होने पर शिवम को छोटी साइकिल पर बैठा दिया जाता है, जिसके ऊपर बारिश से बचाने के लिए छतरी लगाई गई है। माता-पिता का कहना है कि ज्यादा बारिश में भीगने से बच्चे के बीमार होने का डर रहता है, इसलिए उसकी सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। कांवड़ मार्ग पर केवल नन्हे कांवडिय़ों का उत्साह ही आकर्षण नहीं है, बल्कि शिवभक्ति के अलग-अलग रंग भी लोगों को अपनी ओर खींच रहे हैं। कोई भक्त भूत का रूप धारण कर भोलेनाथ की बारात में शामिल हुआ तो किसी ने भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप को कांवड़ के साथ साकार किया। कई भक्त झूला कांवड़ लेकर यात्रा करते नजर आए। बृहस्पतिवार को सामान्य कांवड़ लेकर चलने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी काफी इजाफा हुआ। इसके अलावा आकर्षक कांवड़ झांकियों और सजे-धजे परिवर्तित ट्रैक्टरों के साथ भी श्रद्धालु गंगाजल लेकर आगे बढ़ते दिखाई दिए। पूरे कांवड़ मार्ग पर ‘हर-हर महादेवÓ और ‘बोल बमÓ के जयघोष गूंजते रहे। नन्हे कांवडिय़ों से लेकर बुजुर्गों तक हर उम्र के शिवभक्तों की आस्था ने कांवड़ यात्रा को भक्ति, उत्साह और उमंग से भर दिया है।


