बाल श्रम पर श्रम विभाग का शिकंजा, सात बाल-किशोर श्रमिक चिन्हित

गाजियाबाद। बाल एवं किशोर श्रम के खिलाफ श्रम विभाग ने मंगलवार को जिले में विशेष अभियान चलाकर सात बाल एवं किशोर श्रमिकों का चिन्हांकन किया। जिलाधिकारी के निर्देश और उप श्रमायुक्त डॉ. दिव्य प्रताप सिंह के निर्देशन में गुरुवार को श्रम प्रवर्तन अधिकारियों, एएचटीयूए और केयर फॉर यू एनजीओ की संयुक्त टीम ने शहर के विभिन्न प्रतिष्ठानों पर जांच की। अभियान के दौरान बाल एवं किशोर श्रमिकों को नियोजित किए जाने के मामले सामने आने पर संबंधित सेवायोजकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई शुरू की गई। अभियान के दौरान मालीवाड़ा स्थित मेसर्स ब्रजवासी लस्सी एंड नमकीन से दो किशोर श्रमिक, मेसर्स अमित कॉकरी सेंटर से एक किशोर श्रमिक और जीटी रोड स्थित मेसर्स रावल मशीनरी स्टोर्स से एक किशोर श्रमिक का चिन्हांकन किया गया। इसके अलावा जस्सेपुरा स्थित मेसर्स आलम बिरयानी, जस्सेपुरा स्थित मेसर्स रॉयल डिकोर और घंटाघर स्थित मेसर्स आईसीवाई बॉल से एक-एक बाल श्रमिक को चिन्हित किया गया। कुल सात बाल एवं किशोर श्रमिकों के चिन्हांकन के बाद संबंधित सेवायोजकों के खिलाफ बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के प्रावधानों के तहत मौके पर ही अग्रेत्तर कार्रवाई की गई। टीम की ओर से छह निरीक्षण टिप्पणियां जारी की गईं और उन्हें संबंधित सेवायोजकों को मौके पर ही उपलब्ध कराया गया। अभियान के दौरान कुछ सेवायोजकों और दुकानदारों की ओर से कार्रवाई का विरोध भी किया गया। इस पर अधिकारियों ने उन्हें बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि बच्चों से श्रम कराना कानूनन अपराध है। अधिकारियों ने सेवायोजकों को बाल श्रमिकों को नियोजित नहीं करने के लिए भी जागरूक किया। उप श्रम आयुक्त डॉ. दिव्य प्रताप सिंह ने बताया कि शासन और श्रम आयुक्त के निर्देशानुसार जिले में समय-समय पर बाल एवं किशोर श्रम के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। अभियान का उद्देश्य बाल श्रमिकों को कार्य से मुक्त कराकर उन्हें शिक्षा और बेहतर भविष्य की ओर ले जाना तथा जिले को बाल श्रम मुक्त बनाना है। उन्होंने सभी सेवायोजकों से किसी भी परिस्थिति में बाल श्रम नहीं कराने की अपील की। अधिकारियों ने बताया कि अधिनियम की धारा-3 के तहत प्रतिबंधित खतरनाक श्रेणी के कार्यों में किसी बालक को नियोजित करने या काम करने की अनुमति देने पर छह माह से कम नहीं और दो वर्ष तक की सजा अथवा 20 हजार से 50 हजार रुपये तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। श्रम विभाग ने स्पष्ट किया कि बाल श्रम के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।



