एचपीवी जागरूकता से छात्राओं को मिला स्वस्थ भविष्य का संदेश, सही जानकारी और जागरूकता से कम होगा बीमारी का खतरा

गाजियाबाद। आईटीएस मोहन नगर यूजी कैंपस में ‘शी कनेक्ट-द वूमेन सेल’ के तत्वावधान में मंगलवार को राज्यव्यापी अभियान ‘आनंदी मां-एक जीवन बचाओ अभियान (कैंसर मुक्त भारत यात्रा) 2026-27’ के अंतर्गत एचपीवी जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवा छात्राओं को सर्वाइकल कैंसर, इसके कारणों, शुरुआती लक्षणों, बचाव और एचपीवी टीकाकरण के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ तथा राजभवन, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के निर्देशों के अनुपालन में आयोजित किया गया। सेमिनार में विशेषज्ञों ने छात्राओं को समझाया कि सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस यानी एचपीवी संक्रमण है। समय रहते जानकारी, चिकित्सकीय परामर्श, नियमित स्वास्थ्य जांच और उपलब्ध टीकाकरण के माध्यम से इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर बिना झिझक सवाल पूछने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया।
आईटीएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के उपाध्यक्ष अर्पित चड्ढा ने अपने संदेश में कहा कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता किसी भी स्वस्थ और सशक्त समाज की आधारशिला है। युवा छात्राओं के लिए एचपीवी संक्रमण, सर्वाइकल कैंसर और उससे बचाव के उपायों की सही एवं समय पर जानकारी बेहद जरूरी है। ऐसे जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों में अपने स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदारी और सजगता विकसित करने के साथ समाज में मौजूद भ्रांतियों और झिझक को दूर करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे सेमिनार में मिली प्रमाणिक जानकारी को अपने परिवार और समाज तक पहुंचाएं, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो सकें और कैंसर मुक्त भारत के संकल्प में अपना योगदान दे सकें। आईटीएस यूजी कैंपस की प्रधानाचार्य डॉ. नैंसी शर्मा ने कहा कि एचपीवी जागरूकता सेमिनार का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि छात्राओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक और जिम्मेदार बनाना है। किसी भी गंभीर बीमारी से बचाव में जागरूकता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बीमारी के कारण, लक्षण, बचाव और समय पर जांच की जानकारी होने पर व्यक्ति सही समय पर उचित कदम उठा सकता है।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सीमा वार्ष्णेय रहीं। स्त्री रोग के क्षेत्र में 38 वर्षों का अनुभव रखने वाली डॉ. वार्ष्णेय ने छात्राओं को एचपीवी संक्रमण के प्रसार, सर्वाइकल कैंसर के चेतावनी संकेतों, बचाव के उपायों और नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञ सत्र के दौरान श्रव्य-दृश्य प्रस्तुति के माध्यम से छात्राओं को एचपीवी संक्रमण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। इसके साथ ही देश में विकसित क्यूएचपीवी टीका ‘सर्वावैक’ के बारे में भी जानकारी दी गई। छात्राओं को टीकाकरण से संबंधित आयु वर्ग और खुराक कार्यक्रम की जानकारी देते हुए विशेषज्ञ ने स्वास्थ्य संबंधी निर्णय चिकित्सकीय परामर्श के आधार पर लेने पर जोर दिया। इसके बाद हुए संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र में छात्राओं ने एचपीवी संक्रमण, टीकाकरण, सर्वाइकल कैंसर, स्वास्थ्य जांच और महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे। विशेषज्ञ ने छात्राओं की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें सही और प्रमाणिक स्वास्थ्य जानकारी को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया। आईटीएस यूजी कैंपस की अकादमिक डीन डॉ. विदुषी सिंह ने कहा कि एचपीवी और सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूकता, समय पर जांच तथा बचाव के उपाय महिलाओं के स्वस्थ भविष्य के लिए बेहद जरूरी हैं। उन्होंने छात्राओं से स्वयं जागरूक रहने के साथ अपने परिवार और आसपास की महिलाओं को भी सही जानकारी देने का आह्वान किया। कार्यक्रम में महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी झिझक, भ्रांतियों और गलत धारणाओं को दूर करने पर विशेष जोर दिया गया। छात्राओं को बताया गया कि स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर खुलकर जानकारी लेना और आवश्यकता होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी है। जागरूकता के माध्यम से बीमारी की रोकथाम और समय पर पहचान की दिशा में बेहतर कदम उठाए जा सकते हैं। कार्यक्रम में बीबीए और बीसीए की छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का समन्वय प्रो. कनिका टंडन, डॉ. नीरजा आनंद, प्रो. अंजलि कुशवाहा, डॉ. मोनिका शर्मा और प्रो. श्वेता कुमार ने किया। आयोजन के माध्यम से छात्राओं को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और सही जानकारी को परिवार एवं समाज तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।



